Aashiqon Ki Colony (feat. Madhubanti Bagchi)

Javed Ali

कहिए क्या पेश करें?
दिल और जान हाज़िर
आशिक़ों की बस्ती में
आपका मकान हाज़िर

इश्क़ का इत्र महँगा था
पर ले लिया
शाम-ए-ग़म के लिए
कुछ ज़हर ले लिया
जीने-मरने के सामान
सारे मिले
आशिक़ों की कॉलोनी में
घर ले लिया

आ-हा

दर्द अनोखे हैं
कुछ आशिक़ों के यहाँ
रात कटती नहीं
चाँदनी के तले
इक धुआँ-सा भरा
रहता है मोड़ पर
आहें भरते हैं नुक्कड़ पे
कुछ दिलजले

हो हो, दिल के बहलाने को
इक बहाना ही था
उसके घर का पता
पूछ कर ले लिया

हो आप जो महके यहाँ
ऐसे दिल शाद हुआ
लैला के आने से
सेहरा आबाद हुआ
तेरा दीदार हुआ
सारा दिन पार हुआ
आँखों का रोज़ा था
वक़्त इफ़्तार हुआ

उड़ती ज़ुल्फ़ों के मफ़लर
सँभाले हुए
शायरों ने जो घर
चौक पर ले लिया
इक तरन्नुम की बौछार
उड़ने लगी
इक उदासी का सबने
असर ले लिया

ओ शम्मा जलती रही
हम पिघलते रहे
दिल जलाने का हमने
हुनर ले लिया
आप मालिक-मकान हो गए
आज से
दिल पे हक़ था वही
माँग कर ले लिया

इश्क़ दरिया-ए-आशिक़ है
दीवानों ने
डूब कर ले लिया
तैर कर ले लिया


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